रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार बढ़ाई रेपो रेट, 4.90% से बढ़कर 5.40% पहुँची

नई दिल्ली

रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार पॉलिसी रेट बढ़ा दिया है। इस बार RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट में 0.50 बेसिस अंक यानि 0.50% का इजाफा कर दिया है। ताजा बढ़ोत्तरी के बाद पॉलिसी रेट बढ़कर 5.40% पहुंच गया है। रेपो रेट का अब यह लेवल कोरोनावायरस संक्रमण से पहले के दौर से ज्यादा हो चुका है। महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक मई की मौद्रिक समीक्षा में 0.50% रेपो रेट बढ़ा चुका है। इससे पहले फरवरी में भी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.40% का इजाफा किया था। आज से पहले रेपो रेट 4.90% था।4 महीने में तीसरी बार हुई बढ़ोतरी

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की यह बैठक पहले सोमवार से बुधवार तक होने वाली थी, लेकिन कुछ कारणों से इसे टालना पड़ा था. रिजर्व बैंक ने महंगाई को काबू करने के लिए इस साल मई महीने से रेपो रेट को बढ़ाने (Repo Rate Hike) की शुरुआत की है. रिजर्व बैंक ने मई महीने में मौद्रिक नीति समिति की आपात बैठक (RBI MPC Meeting) बुलाई थी. महंगाई बेहिसाब बढ़ जाने के कारण रिजर्व बैंक को ऐसा करना पड़ा था. मई 2022 की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाया था. उसके बाद जून महीने में मौद्रिक नीति समिति की नियमित बैठक हुई थी, जिसमें रेपो रेट को 0.50 फीसदी बढ़ाया गया था. आरबीआई ने मई महीने में करीब दो साल बाद पहली बार रेपो रेट में बदलाव किया था. करीब दो साल तक रेपो रेट महज 4 फीसदी पर बना रहा था. अब रेपो रेट बढ़कर 5.40 फीसदी पर पहुंच गया है.

इन कारणों से बढ़ाना पड़ा रेपो रेट

सरकार और रिजर्व बैंक के प्रयासों के बाद महंगाई (Inflation) भले ही धीरे-धीरे काबू में आने लगी है, लेकिन दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व समेत कई देशों के सेंट्रल बैंक आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. फेडरल रिजर्व ने अमेरिका में ऐतिहासिक महंगाई के चलते लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहा है. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने भी इसी सप्ताह ब्याज दर में रिकॉर्ड 27 साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी (0.50 फीसदी) का ऐलान किया है. इस कारण लगभग सारे एनालिस्ट यह तय मान रहे थे कि रेपो रेट बढ़ेगा (Repo Rate Hike) ही. ज्यादातर एनालिस्ट का अनुमान था कि रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट को 0.35 फीसदी से 0.50 फीसदी तक बढ़ा सकता है.

महंगाई से फिलहाल राहत नहीं

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है. भारत में महंगाई की ऊंची दरों का सामना करना पड़ रहा हे. जून लगातार छठा ऐसा महीना रहा, जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के अपर लिमिट से ज्यादा रही. भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से आ रहे बदलाव के बीच ग्लोबल फूड प्राइसेज में नरमी, यूक्रेन से गेहूं के निर्यात की पुन: शुरुआत, घरेलू बाजार में खाने के तेल के दाम में नरमी और अच्छे मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी से आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है. हालांकि इसके बाद भी खुदरा महंगाई की दर ऊंची बनी रहने वाली है.

रेपो रेट का EMI कनेक्शन
रेपो रेट वो दर होती है जिस पर RBI से बैंकों को कर्ज मिलता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट उस दर को कहते है जिस दर पर बैंकों को RBI पैसा रखने पर ब्याज देती है। अभी यह 3.35% है। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंक भी ग्राहकों के लिए ब्याज दरों को कम करते हैं। इससे EMI भी घटती है। इसी तरह जब रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण ग्राहक के लिए कर्ज महंगा हो जाता है।

0.50% रेट बढ़ने से कितना फर्क पड़ेगा
 7.55% के रेट पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए का हाउस लोन लिया है। उसकी लोन की EMI 24,260 रुपए है। 20 साल में उसे इस दर से 28,22,304 रुपए का ब्याज देना होगा। यानी, उसे 30 लाख के बदले कुल 58,22,304 रुपए चुकाने होंगे।

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